vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 15: श्राद्ध-विधि
»
श्लोक 33
श्लोक
3.15.33
पिता पितामहश्चैव तथैव प्रपितामह:।
मम तृप्तिं प्रयान्त्वद्य होमाप्यायितमूर्तय:॥ ३३॥
अनुवाद
मेरे पिता, पितामह और परदादा, यज्ञ से बल पाकर आज संतोष प्राप्त करें ॥33॥
May my father, grandfather and great grandfather, strengthened by the sacrifice, attain satisfaction today. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×