श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 14: श्राद्ध-प्रशंसा, श्राद्धमें पात्रापात्रका विचार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.14.26 
तत्राप्यसामर्थ्ययुत: कराग्राग्रस्थितांस्तिलान्।
प्रणम्य द्विजमुख्याय कस्मैचिद्भूप दास्यति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
और यदि वह ऐसा करने में असमर्थ हो तो किसी श्रेष्ठ पुरुष को प्रणाम करके उसे मुट्ठी भर तिल दे देगा ॥26॥
 
And if he is unable to do this then he will pay obeisance to some superior person and give him a handful of sesame seeds. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)