vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन
»
श्लोक 35
श्लोक
3.12.35
धीमान्ह्रीमान्क्षमायुक्तो ह्यास्तिको विनयान्वित:।
विद्याभिजनवृद्धानां याति लोकाननुत्तमान्॥ ३५॥
अनुवाद
बुद्धिमान, विनीत, क्षमाशील, श्रद्धावान और विनम्र पुरुष विद्वान् और श्रेष्ठ पुरुषों के योग्य उत्तम लोकों को प्राप्त होता है ॥35॥
An intelligent, modest, forgiving, faithful and humble man goes to the best worlds worthy of learned and noble men. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×