श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.12.32 
चतुष्पथान्नमस्कुर्यात्काले होमपरो भवेत्।
दीनानभ्युद्धरेत्साधूनुपासीत बहुश्रुतान्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को चाहिए कि वह तीर्थों को नमस्कार करे, उचित समय पर अग्निहोत्र करे, दीन-दुखियों का उद्धार करे और विद्वान् संतों की संगति करे॥ 32॥
 
One should salute the crossings, perform Agnihotra at the appropriate time, rescue the poor and the suffering, and keep the company of learned saints.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)