श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.12.23 
नारभेत कलिं प्राज्ञश्शुष्कवैरं च वर्जयेत्।
अप्यल्पहानिस्सोढव्या वैरेणार्थागमं त्यजेत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि कलह न बढ़ाए और अनावश्यक वैर-विरोध का भी त्याग कर दे। थोड़ी हानि सह ले, पर यदि उससे कुछ लाभ हो तो उसे भी छोड़ दे। 23॥
 
A wise man should not increase discord and should also give up unnecessary animosity. Bear a little loss, but if you get some benefit from it then leave it also. 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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