श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.12.21 
नासमञ्जसशीलैस्तु सहासीत कथञ्चन।
सद‍्वृत्तसन्निकर्षो हि क्षणार्द्धमपि शस्यते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
शंकालु लोगों के साथ कभी मत रहो। पुण्यात्मा पुरुषों का आधे क्षण का भी संग अत्यंत प्रशंसनीय है। ॥21॥
 
Never stay with suspicious people. Even half a moment's company with virtuous men is highly praiseworthy. ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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