vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 12: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन
»
श्लोक 19
श्लोक
3.12.19
न स्नायान्न स्वपेन्नग्नो न चैवोपस्पृशेद् बुध:।
मुक्तकेशश्च नाचामेद्देवाद्यर्चां च वर्जयेत्॥ १९॥
अनुवाद
नग्न अवस्था में स्नान, शयन और जल नहीं पीना चाहिए। खुले केशों से जल नहीं पीना चाहिए और न ही देवताओं की पूजा करनी चाहिए ॥19॥
One should not bathe, sleep or sip water naked. One should not sip water or worship gods with open hair. ॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×