श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  3.11.98 
इत्युच्चार्य स्वहस्तेन परिमृज्य तथोदरम्।
अनायासप्रदायीनि कुर्यात्कर्माण्यतन्द्रित:॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर वह अपने पेट को हाथ से मलकर फिर सावधान हो जाए और ऐसे कामों में लग जाए जिनमें अधिक परिश्रम न करना पड़े॥ 98॥
 
Having said this, he should rub his stomach with his hand and then become cautious and engage in activities that do not require too much labour.॥ 98॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)