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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन
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श्लोक 87
श्लोक
3.11.87
अश्नीयात्तन्मयो भूत्वा पूर्वं तु मधुरं रसम्।
लवणाम्लौ तथा मध्ये कटुतिक्तादिकांस्तत:॥ ८७॥
अनुवाद
भोजन को एकाग्रतापूर्वक खाओ और पहले मधुर रस, फिर लवण और अम्ल (खट्टे) रस तथा अंत में कड़वे और तीखे पदार्थ खाओ ॥87॥
Eat food with concentration and first eat sweet juices, then salt and acid (sour) juices and finally bitter and pungent foods. 87॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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