श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  3.11.80 
प्राङ्मुखोदङ्मुखो वापि न चैवान‍्यमना नर:।
अन्नं प्रशस्तं पथ्यं च प्रोक्षितं प्रोक्षणोदकै:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके, बिना विचलित हुए, साष्टांग प्रणाम करके रखे हुए मंत्रयुक्त जल से छिड़ककर, पौष्टिक एवं सात्विक भोजन करना चाहिए ॥ 80॥
 
One should face east or north and, without being distracted, should eat healthy and wholesome food after sprinkling it with water infused with mantras, kept for prostration. ॥ 80॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)