श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  3.11.71 
तत: स्ववासिनीदु:खिगर्भिणीवृद्धबालकान्।
भोजयेत्संस्कृतान्नेन प्रथमं चरमं गृही॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात गृहस्थ को चाहिए कि वह पितृगृह में रहने वाली विवाहित कन्याओं, दुःखी एवं गर्भवती स्त्रियों, वृद्धों एवं बालकों को संस्कृत भोजन खिलाए और अंत में स्वयं भी भोजन करे ॥71॥
 
Thereafter, the householder should feed Sanskrit food to the married girls, distressed and pregnant women, old people and children living in the ancestral house and finally eat the food himself. 71॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)