श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  3.11.68 
अतिथिर्यस्य भग्नाशो गृहात्प्रतिनिवर्तते।
स तस्मै दुष्कृतं दत्त्वा पुण्यमादाय गच्छति॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
जब कोई अतिथि किसी के घर से निराश होकर लौटता है, तो वह उसे उसके पाप दे देता है और उसके पुण्य छीन लेता है ॥68॥
 
When a guest returns disappointed from someone's house, he gives him his sins and takes away his good deeds. ॥ 68॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)