श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.11.67 
इत्येतेऽतिथय: प्रोक्ता: प्रागुक्ता भिक्षवश्च ये।
चतुर: पूजयित्वैतान्नृप पापात्प्रमुच्यते॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
प्रथम तीन और भिक्षु - ये चार अतिथि कहलाते हैं। हे राजन! इन चारों की पूजा करने से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है। 67.
 
The first three and the bhikshus—these four are called guests. O King! By worshipping these four, a man becomes free from all sins. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)