श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  3.11.62 
अकिञ्चनमसम्बन्धमज्ञातकुलशीलिनम्।
असम्पूज्यातिथिं भुक्त्वा भोक्तुकामं व्रजत्यध:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
जिसके पास भोजन नहीं है, जिससे उसका कोई सम्बन्ध नहीं है, जिसके कुल और चरित्र का पता नहीं है और जो भोजन करना चाहता है, ऐसे अतिथि का स्वागत किए बिना भोजन करने वाला मनुष्य नीच गति को प्राप्त होता है ॥ 62॥
 
A man falls to a low state if he eats without welcoming a guest who has no provisions, with whom he has no relations, whose family and character are unknown and who wishes to eat. ॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)