श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  3.11.61 
अज्ञातकुलनामानमन्यदेशादुपागतम्।
पूजयेदतिथिं सम्यङ् नैकग्रामनिवासिनम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
जिसका कुल और नाम अज्ञात हो तथा जो दूसरे देश से आया हो, ऐसे अतिथि का स्वागत करना चाहिए। अपने ही गाँव में रहने वाले व्यक्ति को अतिथि मानकर उसकी पूजा करना उचित नहीं है ॥61॥
 
One should welcome a guest whose family and name are not known and who has come from another country. It is not appropriate to worship a person living in one's own village as a guest. ॥ 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)