श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  3.11.57 
श्वचाण्डालविहङ्गानां भुवि दद्यान्नरेश्वर।
ये चान्ये पतिता: केचिदपुत्रा: सन्ति मानवा:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
हे नरेश्वर! तत्पश्चात् पृथ्वी पर कुत्ते, चाण्डाल, पक्षी तथा अन्य पतित एवं पुत्रहीन मनुष्य की तृप्ति के लिए यज्ञ करना चाहिए ॥57॥
 
Hey Nareshwar! After that, sacrifices should be placed on the earth for the satisfaction of dogs, Chandalas, birds and any other fallen and sonless man. 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)