श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  3.11.56 
इत्युच्चार्य नरो दद्यादन्नं श्रद्धासमन्वित:।
भुवि सर्वोपकाराय गृही सर्वाश्रयो यत:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर गृहस्थ को चाहिए कि वह भक्तिपूर्वक समस्त प्राणियों के हित के लिए पृथ्वी पर अन्न अर्पित करे, क्योंकि गृहस्थ ही सबका आश्रय है ॥56॥
 
After saying this, a householder should with devotion offer food to the earth for the benefit of all beings, because the householder is the shelter of all. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)