श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.11.54 
भूतानि सर्वाणि तथान्नमेत-
दहं च विष्णुर्न ततोऽन्यदस्ति।
तस्मादहं भूतनिकायभूत-
मन्नं प्रयच्छामि भवाय तेषाम्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
समस्त प्राणी, यह अन्न और मैं - ये सब विष्णु हैं; क्योंकि उनसे भिन्न कुछ भी नहीं है। अतः मैं समस्त प्राणियों के शरीररूप इस अन्न को उनके पोषण के लिए अर्पित करता हूँ ॥ 54॥
 
All beings, this food and I—all are Vishnu; because there is nothing different from Him. Therefore, I offer this food, which is the body of all beings, for their nourishment. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)