श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.11.53 
येषां न माता न पिता न बन्धु-
र्नैवान‍्नसिद्धिर्न तथान्नमस्ति।
तत्तृप्तयेऽन्नं भुवि दत्तमेतत्
ते यान्तु तृप्तिं मुदिता भवन्तु॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जिनके माता, पिता या अन्य कोई सम्बन्धी नहीं हैं और जो अन्नदान या भोजन कराने का साधन भी नहीं रखते, उनकी तृप्ति के लिए मैंने यह अन्न पृथ्वी पर रखा है; वे तृप्त हों और आनन्दित हों ॥ 53॥
 
I have placed this food on the earth to satisfy those who have no mother, father or any other relative and who do not have the means to offer food or even food; let them be satisfied and rejoice. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)