श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.11.47 
प्रागुत्तरे च दिग्भागे धन्वन्तरिबलिं बुध:।
निर्वपेद्वैश्वदेवं च कर्म कुर्यादत: परम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
पूर्व और उत्तर दिशा में धन्वन्तरि को आहुति दें, तत्पश्चात बलिवैश्वदेव अनुष्ठान करें।
 
Offer sacrifice to Dhanvantari in the east and north directions, and after that perform the Balivaishvadeva rituals. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)