vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन
»
श्लोक 47
श्लोक
3.11.47
प्रागुत्तरे च दिग्भागे धन्वन्तरिबलिं बुध:।
निर्वपेद्वैश्वदेवं च कर्म कुर्यादत: परम्॥ ४७॥
अनुवाद
पूर्व और उत्तर दिशा में धन्वन्तरि को आहुति दें, तत्पश्चात बलिवैश्वदेव अनुष्ठान करें।
Offer sacrifice to Dhanvantari in the east and north directions, and after that perform the Balivaishvadeva rituals. 47.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×