श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 42-43
 
 
श्लोक  3.11.42-43 
अपूर्वमग्निहोत्रं च कुर्यात्प्राग्ब्रह्मणे नृप॥ ४२॥
प्रजापतिं समुद्दिश्य दद्यादाहुतिमादरात्।
गुह्येभ्य: काश्यपायाथ ततोऽनुमतये क्रमात्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे नृप! फिर अपूर्व अग्निहोत्र करो, जिसमें पहले ब्रह्मा को, फिर क्रमशः प्रजापति, गुह्य, कश्यप और ऐष्म को आदरपूर्वक आहुति दो॥42-43॥
 
O Nripa! Then perform Apoorva Agnihotra, in which first offer sacrifices to Brahma and then to Prajapati, Guhya, Kashyap and Aishma respectively with respect. 42-43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)