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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन
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श्लोक 39
श्लोक
3.11.39
दत्त्वा काम्योदकं सम्यगेतेभ्य: श्रद्धयान्वित:।
आचम्य च ततो दद्यात्सूर्याय सलिलाञ्जलिम्॥ ३९॥
अनुवाद
उपर्युक्त प्राणियों को भक्तिपूर्वक इच्छित जल अर्पण करके जल को घूँट-घूँटकर पीना चाहिए और फिर सूर्यदेव को जल अर्पित करना चाहिए ॥39॥
After offering the desired water to the above-mentioned creatures with devotion, one should sip water and then offer water to the Sun God. ॥ 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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