श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.11.37 
यत्र क्वचनसंस्थानां क्षुत्तृष्णोपहतात्मनाम्।
इदमाप्यायनायास्तु मया दत्तं तिलोदकम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
मेरे द्वारा दिया गया यह तिलोदक भूख-प्यास से पीड़ित प्राणियों को, जहाँ कहीं भी हों, संतुष्ट करे ॥37॥
 
May this tilodaka given by me satisfy the beings tormented by hunger and thirst, wherever they may be. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)