श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.11.35 
नरकेषु समस्तेषु यातनासु च ये स्थिता:।
तेषामाप्यायनायैतद्दीयते सलिलं मया॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
मैं यह जल उन प्राणियों को अर्पित करता हूँ जो समस्त नरकों में नाना प्रकार की यातनाएँ भोग रहे हैं ॥35॥
 
I offer this water to those beings who are suffering various kinds of tortures in all the hells. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)