श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.11.26 
कूपेषूद्‍धृततोयेन स्नानं कुर्वीत वा भुवि।
गृहेषूद्‍धृततोयेन ह्यथवा भुव्यसम्भवे॥ २६॥
 
 
अनुवाद
या फिर कुएँ से पानी भरकर पास की ज़मीन पर नहाना चाहिए और अगर ज़मीन पर नहाना मुमकिन न हो तो घर पर कुएँ के पानी से नहाना चाहिए।
 
Or one should draw water from the well and bathe on the ground nearby. And if it is not possible to bathe on the ground, then one should bathe at home with the water brought from the well. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)