श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.11.15 
तृणैरास्तीर्य वसुधां वस्त्रप्रावृतमस्तक:।
तिष्ठेन्नातिचिरं तत्र नैव किञ्चिदुदीरयेत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
शौच के समय भूमि को तिनकों से और सिर को वस्त्र से ढक लेना चाहिए तथा उस स्थान पर अधिक देर तक नहीं रहना चाहिए और न ही कुछ बोलना चाहिए ॥15॥
 
At the time of defecation one should cover the ground with straws and the head with a cloth and should not remain at that place for long and should not speak anything. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)