vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन
»
श्लोक 14
श्लोक
3.11.14
उदङ्मुखो दिवा मूत्रं विपरीतमुखो निशि।
कुर्वीतानापदि प्राज्ञो मूत्रोत्सर्गं च पार्थिव॥ १४॥
अनुवाद
हे राजन! यदि कोई विशेष आपत्ति न हो तो बुद्धिमान पुरुष को दिन में उत्तर की ओर और रात्रि में दक्षिण की ओर मुख करके मूत्र त्याग करना चाहिए॥14॥
O King, if there is no special objection then a wise man should urinate facing north during the day and facing south during the night.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×