श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  3.11.126 
मृतो नरकमभ्येति हीयतेऽत्रापि चायुष:।
परदाररति: पुंसामिह चामुत्र भीतिदा॥ १२६॥
 
 
अनुवाद
परस्त्री में आसक्ति रखने से मनुष्य को इस लोक और परलोक दोनों में भय लगता है; इस लोक में उसकी आयु कम हो जाती है और मरने के बाद वह नरक में जाता है॥126॥
 
Attachment to another's wife is frightening for a man both in this world and the next; in this world his lifespan is shortened and after death he goes to hell.॥ 126॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)