श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  3.11.115 
नाद्यूनां तु स्त्रियं गच्छेन्नातुरां न रजस्वलाम्।
नानिष्टां न प्रकुपितां न त्रस्तां न च गर्भिणीम्॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु यदि स्त्री दुःखी, रोगी, रजस्वला, कामातुर, क्रोधी, दुःखी या गर्भवती हो, तो उसका संग न करो ॥115॥
 
But if the woman is unhappy, sick, menstruating, lustful, short-tempered, sad or pregnant, then do not keep her company. 115॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)