श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  3.11.113 
प्राच्यां दिशि शिरश्शस्तं याम्यायामथ वा नृप।
सदैव स्वपत: पुंसो विपरीतं तु रोगदम्॥ ११३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! सोते समय सिर सदैव पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए। विपरीत दिशा में सिर रखने से रोग उत्पन्न होते हैं ॥113॥
 
O King! While sleeping one should always keep one's head towards the east or south. Keeping one's head in the opposite direction leads to diseases. ॥ 113॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)