श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  3.11.112 
नाविशालां न वै भग्नां नासमां मलिनां न च।
न च जन्तुमयीं शय्यामधितिष्ठेदनास्तृताम्॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
जो पलंग छोटा हो, टूटा हुआ हो, ऊबड़-खाबड़ हो, गंदा हो, जिसमें जीव हों या जिस पर कुछ बिछा न हो, उस पर नहीं सोना चाहिए ॥112॥
 
One should not sleep on a bed that is not large enough, is broken, is uneven, is dirty, has living beings in it or on which there is nothing spread. ॥ 112॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)