श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  3.11.111 
कृतपादादिशौचस्तु भुक्त्वा सायं ततो गृही।
गच्छेच्छय्यामस्फुटितामपि दारुमयीं नृप॥ १११॥
 
 
अनुवाद
हे नृप! तत्पश्चात गृहस्थ को चाहिए कि वह सायंकाल भोजन करके हाथ-पैर धोकर छिद्ररहित लकड़ी के पलंग पर लेट जाए ॥111॥
 
O Nripa! Thereafter, the householder should have his evening meal and wash his hands and feet and lie down on a wooden bed without holes. 111॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)