श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  3.11.110 
अन्नशाकाम्बुदानेन स्वशक्त्या पूजयेत्पुमान्।
शयनप्रस्तरमहीप्रदानैरथवापि तम्॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, शाक या जल देकर तथा शयन के लिए बिछौना, घास की चटाई या भूमि देकर उसका आदर करना चाहिए॥110॥
 
One should honour a person according to his capacity by giving him food, vegetables or water for eating and a bed or a mat of straw or even the earth to sleep on.॥ 110॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)