श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 11: गृहस्थसम्बन्धी सदाचारका वर्णन  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  3.11.108 
दिवातिथौ तु विमुखे गते यत्पातकं नृप।
तदेवाष्टगुणं पुंसस्सूर्योढे विमुखे गते॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! दिन में अतिथि के लौटने पर जो पाप लगता है, वह सूर्यास्त के समय लौटने पर आठ गुना अधिक हो जाता है ॥108॥
 
O King! The sin committed when a guest returns during the day is eight times more when he returns at sunset. ॥108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)