श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 10: जातकर्म, नामकरण और विवाह-संस्कारकी विधि  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.10.5 
युग्मांस्तु प्राङ्मुखान्विप्रान्भोजयेन्मनुजेश्वर।
यथा वृत्तिस्तथा कुर्याद्दैवं पित्र्यं द्विजन्मनाम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे नरेश्वर! दम्पति को पूर्वाभिमुख बिठाकर ब्राह्मणों को भोजन कराओ और द्विजातियों के आचरण के अनुसार देवता और पितृपक्ष की तृप्ति के लिए श्राद्ध करो॥5॥
 
Hey Nareshwar! Make the couple sit facing east and serve food to the Brahmins and perform Shraddha for the satisfaction of God and Pitru Paksha as per the behavior of the two-caste people. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)