vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 1: पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन
»
श्लोक 18
श्लोक
3.1.18
ज्योतिर्धामा पृथु: काव्यश्चैत्रोऽग्निर्वनकस्तथा।
पीवरश्चर्षयो ह्येते सप्त तत्रापि चान्तरे॥ १८॥
अनुवाद
ज्योतिर्धाम, पृथु, काव्य, चैत्र, अग्नि, वनक और पीवर- ये उस मन्वंतर के सात ऋषि थे। 18॥
Jyotirdhama, Prithu, Kavya, Chaitra, Agni, Vanak and Peevar – these were the seven sages of that Manvantar. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×