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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 1: पहले सात मन्वन्तरोंके मनु, इन्द्र, देवता, सप्तर्षि और मनुपुत्रोंका वर्णन
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श्लोक 15
श्लोक
3.1.15
वसिष्ठतनया ह्येते सप्त सप्तर्षयोऽभवन्।
अज: परशुदीप्ताद्यास्तथोत्तममनोस्सुता:॥ १५॥
अनुवाद
तथा वसिष्ठजी के सात पुत्र सप्तर्षि हुए और अज, परशु और दीप्त आदि उत्तममनु के पुत्र हुए ॥15॥
And Vasisthaji's seven sons were the Saptarishis and Aja, Parshu and Deepta etc. were the sons of Uttammanu. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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