श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 9: ज्योतिश्चक्र और शिशुमारचक्र  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.9.4 
शिशुमाराकृति प्रोक्तं यद्‍रूपं ज्योतिषां दिवि।
नारायणोऽयनं धाम्नां तस्याधार: स्वयं हृदि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मैंने तुम्हें आकाश में स्थित ग्रहों के शिशु-मार स्वरूप का वर्णन किया है। अनन्त तेज के आश्रय भगवान नारायण स्वयं उसके हृदय के आधार हैं।॥4॥
 
I have described to you the Shishu-mara form of the planets in the sky. Lord Narayana himself, the shelter of the infinite radiance, is the support of its heart. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)