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vishnu 2.9.14: जो जल बिना बादलों के, सूर्य की उपस्थिति में गिरता है, वह सूर्य की किरणों से बरसा हुआ, आकाशगंगा का जल है ॥14॥   |   vishnu अध्याय 2.9: ज्योतिश्चक्र और शिशुमारचक्र   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 9: ज्योतिश्चक्र और शिशुमारचक्र  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.9.14 
दृष्टसूर्यं हि यद्वारि पतत्यभ्रैर्विना दिव:।
आकाशगङ्गासलिलं तद‍्गोभि: क्षिप्यते रवे:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो जल बिना बादलों के, सूर्य की उपस्थिति में गिरता है, वह सूर्य की किरणों से बरसा हुआ, आकाशगंगा का जल है ॥14॥
 
The water that falls without clouds, in the presence of the Sun, is the water of the Milky Way, rained by the rays of the Sun. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)