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vishnu 2.9.13: हे द्विजोत्तम! मनुष्य नरक में नहीं जाता, क्योंकि उसके स्पर्शमात्र से उसके पाप और कल्मष धुल जाते हैं। इसलिए इसे दिव्य स्नान कहते हैं। 13॥   |   vishnu अध्याय 2.9: ज्योतिश्चक्र और शिशुमारचक्र   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 9: ज्योतिश्चक्र और शिशुमारचक्र  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.9.13 
तस्य संस्पर्शनिर्धूतपापपङ्को द्विजोत्तम।
न याति नरकं मर्त्यो दिव्यं स्नानं हि तत्स्मृतम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे द्विजोत्तम! मनुष्य नरक में नहीं जाता, क्योंकि उसके स्पर्शमात्र से उसके पाप और कल्मष धुल जाते हैं। इसलिए इसे दिव्य स्नान कहते हैं। 13॥
 
O Dwijottam! A person does not go to hell because his sins and dirt are washed away by his mere touch. Hence it is called divine bath. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)