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vishnu 2.9.10: चन्द्रमा द्वारा प्राप्त यह जल बादलों द्वारा तुरंत दूषित नहीं होता, इसलिए इसे 'ओभ्र' कहते हैं। हे मैत्रेय! कालजनित संस्कार प्राप्त होने पर यह अशुद्ध जल पवित्र होकर वायु की प्रेरणा से पृथ्वी पर बरसने लगता है। 10॥   |   vishnu अध्याय 2.9: ज्योतिश्चक्र और शिशुमारचक्र   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 9: ज्योतिश्चक्र और शिशुमारचक्र  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.9.10 
न भ्रश्यन्ति यतस्तेभ्यो जलान्यभ्राणि तान्यत:।
अभ्रस्था: प्रपतन्त्यापो वायुना समुदीरिता:।
संस्कारं कालजनितं मैत्रेयासाद्य निर्मला:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
चन्द्रमा द्वारा प्राप्त यह जल बादलों द्वारा तुरंत दूषित नहीं होता, इसलिए इसे 'ओभ्र' कहते हैं। हे मैत्रेय! कालजनित संस्कार प्राप्त होने पर यह अशुद्ध जल पवित्र होकर वायु की प्रेरणा से पृथ्वी पर बरसने लगता है। 10॥
 
This water received by the moon does not get immediately corrupted by the clouds, hence it is called 'Obhra'. O Maitreya! On attaining the time-born sanskar, this impure water becomes pure and starts raining on the earth with the inspiration of wind. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)