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vishnu 2.8.99: हे विप्र! यह उन संयमी और दोष-मलों से रहित, पुण्य-पाप क्षीण हो जाने वाले ऋषियों का परमधाम है ॥99॥   |   vishnu अध्याय 2.8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  2.8.99 
निर्धूतदोषपङ्कानां यतीनां संयतात्मनाम्।
स्थानं तत्परमं विप्र पुण्यपापपरिक्षये॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
हे विप्र! यह उन संयमी और दोष-मलों से रहित, पुण्य-पाप क्षीण हो जाने वाले ऋषियों का परमधाम है ॥99॥
 
Hey Vipra! This is the supreme abode of the sages who have a disciplined soul and are free from faults and impurities, after their virtues and sins have diminished. 99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)