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vishnu 2.8.40: हे मैत्रेय! जैसे कुम्हार के चाक का हब अपने स्थान पर घूमता रहता है, वैसे ही डंडा भी अपने स्थान पर घूमता रहता है ॥40॥   |   vishnu अध्याय 2.8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.8.40 
कुलालचक्रनाभिस्तु यथा तत्रैव वर्तते।
ध्रुवस्तथा हि मैत्रेय तत्रैव परिवर्तते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! जैसे कुम्हार के चाक का हब अपने स्थान पर घूमता रहता है, वैसे ही डंडा भी अपने स्थान पर घूमता रहता है ॥40॥
 
O Maitreya! Just as the hub of the Potter's wheel keeps rotating at its place, so too the pole keeps rotating at its place. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)