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vishnu 2.8.4: सम्पूर्ण कालचक्र अक्षयस्वरूप संवत्सरक चक्र में स्थित है जिसमें प्रातः, मध्याह्न और अपराह्न रूपी तीन नाभियाँ, परिवत्सरादि रूपी पाँच रश्मियाँ और छह ऋतुओं रूपी छः पर्व हैं ॥4॥   |   vishnu अध्याय 2.8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.8.4 
त्रिनाभिमति पञ्चारे षण्नेमिन्यक्षयात्मके।
संवत्सरमये कृत्स्नं कालचक्रं प्रतिष्ठितम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण कालचक्र अक्षयस्वरूप संवत्सरक चक्र में स्थित है जिसमें प्रातः, मध्याह्न और अपराह्न रूपी तीन नाभियाँ, परिवत्सरादि रूपी पाँच रश्मियाँ और छह ऋतुओं रूपी छः पर्व हैं ॥4॥
 
The entire Kaalchakra is situated in the Akshayaswaroop Samvatsarak Chakra having three navels in the form of morning, noon and afternoon, five rays in the form of Parivatsaradi and six nodes in the form of six seasons. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)