Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
vishnu 2.8.35: जैसे कुम्हार के चाक के बीच में स्थित प्राणी धीरे-धीरे चलता है, वैसे ही उत्तरायण के समय सूर्य भी धीरे-धीरे चलता है ॥ 35॥   |   vishnu अध्याय 2.8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.8.35 
कुलालचक्रमध्यस्थो यथा मन्दं प्रसर्पति।
तथोदगयने सूर्य: सर्पते मन्दविक्रम:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जैसे कुम्हार के चाक के बीच में स्थित प्राणी धीरे-धीरे चलता है, वैसे ही उत्तरायण के समय सूर्य भी धीरे-धीरे चलता है ॥ 35॥
 
Just as a living being situated in the middle of a Potter's wheel moves slowly, so does the Sun move slowly during the time of Uttarayan. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)