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vishnu 2.8.34: हे द्विज पुरुष! दक्षिणायन में दिन में तीव्र गति से चलने के कारण सूर्य उस समय के साढ़े तेरह नक्षत्रों को बारह मुहूर्त में पार कर लेता है, किन्तु रात्रि में (धीरे-धीरे चलने के कारण) वह उतने ही नक्षत्रों को अठारह मुहूर्त में पार कर लेता है।   |   vishnu अध्याय 2.8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.8.34 
सूर्यो द्वादशभि: शैघ्र्यान्मुहूर्तैर्दक्षिणायने।
त्रयोदशार्द्धमृक्षाणामह्ना तु चरति द्विज।
मुहूर्तैस्तावदृक्षाणि नक्तमष्टादशैश्चरन्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज पुरुष! दक्षिणायन में दिन में तीव्र गति से चलने के कारण सूर्य उस समय के साढ़े तेरह नक्षत्रों को बारह मुहूर्त में पार कर लेता है, किन्तु रात्रि में (धीरे-धीरे चलने के कारण) वह उतने ही नक्षत्रों को अठारह मुहूर्त में पार कर लेता है।
 
O twice born person! By moving rapidly during the day in the Dakshinayan the Sun crosses the thirteen and a half constellations of that time in twelve muhurats, but during the night (due to moving slowly) it crosses the same number of constellations in eighteen muhurats.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)