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vishnu 2.8.33: इसलिए वह वायु के वेग से बहुत तेजी से चलता हुआ थोड़े ही समय में अपना उत्तम मार्ग तय कर लेता है ॥33॥   |   vishnu अध्याय 2.8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.8.33 
अतिवेगितया कालं वायुवेगबलाच्चरन्।
तस्मात्प्रकृष्टां भूमिं तु कालेनाल्पेन गच्छति॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
इसलिए वह वायु के वेग से बहुत तेजी से चलता हुआ थोड़े ही समय में अपना उत्तम मार्ग तय कर लेता है ॥33॥
 
Therefore, moving very quickly at the speed of the wind, he covers his excellent path in a short time. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)