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vishnu 2.8.122: जो गंगा तीनों लोकों को पवित्र करने में समर्थ है और जिससे उत्पन्न हुई है, वह भगवान् का तीसरा परम पद है ॥122॥   |   vishnu अध्याय 2.8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  2.8.122 
यत: सा पावनायालं त्रयाणां जगतामपि।
समुद्भूता परं तत्तु तृतीयं भगवत्पदम्॥ १२२॥
 
 
अनुवाद
जो गंगा तीनों लोकों को पवित्र करने में समर्थ है और जिससे उत्पन्न हुई है, वह भगवान् का तीसरा परम पद है ॥122॥
 
The Ganga which is capable of purifying the three worlds and from which it has originated, is the third supreme position of the Lord. ॥122॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे द्वितीयेंऽशे अष्टमोऽध्याय:॥ ८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)