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vishnu 2.8.121: और जिनका नाम 'गंगा, गंगा' सौ योजन की दूरी से भी उच्चारित करने पर तीन जन्मों के संचित पापों को नष्ट कर देता है ॥121॥   |   vishnu अध्याय 2.8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  2.8.121 
गङ्गा गङ्गेति यैर्नाम योजनानां शतेष्वपि।
स्थितैरुच्चारितं हन्ति पापं जन्मत्रयार्जितम्॥ १२१॥
 
 
अनुवाद
और जिनका नाम 'गंगा, गंगा' सौ योजन की दूरी से भी उच्चारित करने पर तीन जन्मों के संचित पापों को नष्ट कर देता है ॥121॥
 
And whose name 'Ganga, Ganga' when uttered even from a distance of a hundred yojanas destroys the sins accumulated over three births [of the living being]. ॥121॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)