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vishnu 2.8.117: जिसके प्रवाह में पुत्रों द्वारा अपने पितरों को एक दिन भी श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करने से उन्हें सौ वर्षों तक दुर्लभ तृप्ति प्राप्त होती है।   |   vishnu अध्याय 2.8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  2.8.117 
दत्ता: पितृभ्यो यत्रापस्तनयै: श्रद्धयान्वितै:।
समाशतं प्रयच्छन्ति तृप्तिं मैत्रेय दुर्लभाम्॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
जिसके प्रवाह में पुत्रों द्वारा अपने पितरों को एक दिन भी श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करने से उन्हें सौ वर्षों तक दुर्लभ तृप्ति प्राप्त होती है।
 
In whose flow, even a single day's offering of water by sons to their forefathers with devotion, grants them rare satisfaction for a hundred years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)